सुभारती अस्पताल ने विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ धाम में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर दिया जीवनरक्षक प्रशिक्षण

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रुद्रप्रयाग। चिकित्सा सेवा को अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकालकर दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। भारतीय सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स की पंचरक्षक 2.0 पहल के अंतर्गत विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर के रूप में प्रसिद्ध तुंगनाथ महादेव मंदिर में लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में आम नागरिकों को तत्काल जीवन बचाने के लिए आवश्यक प्राथमिक कौशल प्रदान करना था। कार्यक्रम में लगभग 45 प्रतिभागियों को पांच महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सृष्टि वर्मा, सीनियर रेजिडेंट, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अस्पताल के प्रचार प्रसार प्रमुख डॉ. प्रशांत कुमार भटनागर द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि सुभारती अस्पताल का यह प्रयास इस संदेश को मजबूत करता है कि चिकित्सा शिक्षा और जीवनरक्षक प्रशिक्षण की पहुंच भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सुभारती अस्पताल की ओर से अस्पताल से लेकर सुदूर हिमालयी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता को पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
पंचरक्षक 2.0 के तहत पांच जीवनरक्षक कौशल सिखाए गए
• कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन– हृदय गति रुकने की स्थिति में जीवन बचाने की प्रक्रिया
• लेग रेज– आपात स्थिति में रक्त संचार बनाए रखने में सहायक तकनीक
• रिकवरी पोजीशन – बेहोश लेकिन सांस ले रहे व्यक्ति को सुरक्षित स्थिति में रखने की विधि
• एब्डॉमिनल थ्रस्ट– सांस की नली में भोजन या बाहरी वस्तु फंसने की स्थिति में प्राथमिक सहायता
• इमरजेंसी किट की तैयारी – आपातकालीन परिस्थितियों के लिए आवश्यक सामग्री एवं उपकरणों की तैयारी
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में पहला मददगार कोई भी व्यक्ति हो सकता है। दुर्घटना, अचानक बेहोशी, हृदय गति रुकने अथवा सांस की नली में अवरोध जैसी परिस्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में सही जानकारी और समय पर की गई प्राथमिक सहायता किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. (ग्रुप कैप्टन) जी.एस. जीते ने कहा कि तुंगनाथ धाम जैसे दुर्गम हिमालयी तीर्थ स्थल पर जीवनरक्षक प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चिकित्सा शिक्षा, आपदा एवं आपातकालीन तैयारी तथा सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ राहुल शुक्ल ने कहा कि लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं एवं अन्य उपस्थित व्यक्तियों को जीवनरक्षक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाना आपात परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।

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